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धमतरी/सिहावा :- नगरी में विकास की नई धारा: महानदी रिवर फ्रंट को मिलेगा भव्य आधुनिक स्वरूप, 20 करोड़ की सीएसआर से बनेगा पर्यटन का नया केंद्र

सिहावा नगरी में विकास की नई धारा: महानदी रिवर फ्रंट को मिलेगा भव्य आधुनिक स्वरूप, 20 करोड़ की सीएसआर से बनेगा पर्यटन का नया केंद्र

धमतरी, 1 जनवरी 2026 : छत्तीसगढ़ की जीवनरेखा महानदी के उद्गम स्थल सिहावा नगरी में एक ऐतिहासिक परिवर्तन की तैयारी हो रही है। साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) ने कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) के तहत 20 करोड़ रुपये की मंजूरी दी है, जिससे महानदी रिवर फ्रंट को धार्मिक, सांस्कृतिक और पर्यटन केंद्र के रूप में नया जीवन मिलेगा। यह परियोजना न केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करेगी, बल्कि रोजगार और सांस्कृतिक विरासत को नई ऊँचाई प्रदान करेगी।
अवेकनिंग अभियान (MAA) ने पहले ही नदी को अतिक्रमण, गाद और कचरे से मुक्त कर पुनर्जीवित किया है। कलेक्टर मिश्रा ने कहा, “जल शक्ति अभियान और ‘मोर गांव, मोर पानी’ की भावना से प्रेरित होकर हमने उद्गम से 12 किमी तक नदी को साफ-सुथरा बनाया। अब SECL की यह CSR परियोजना MAA को पूर्णता प्रदान करेगी, जो सिहावा को पर्यटन का हॉटस्पॉट बना देगी।”

तीन जोन में बंटेगा भव्य विकास: धार्मिक आस्था से पर्यटन तक

परियोजना को तीन प्रमुख जोन में विभाजित किया गया है, प्रत्येक अपनी अनूठी पहचान के साथ। स्टेट हाईवे-6 से जुड़ाव सुनिश्चित कर आवागमन को सुगम बनाया जाएगा।

जोन A: कर्णेश्वर महादेव परिसर – आस्था का नया द्वार

कर्णेश्वर महादेव मंदिर को भव्य पत्थर का प्रवेश द्वार, मेला ग्राउंड, कंपाउंड वॉल, हाई मास्ट लाइटिंग और एवेन्यू प्लांटेशन से सजाया जाएगा। अजीविका भवन, पर्यटक सूचना एवं स्वास्थ्य केंद्र स्थापित होंगे, जो स्थानीय रोजगार को बढ़ावा देंगे। सिहावा सरपंच उषा किरण नाग ने कहा, “यह विकास हमारी आस्था को मजबूत करेगा और युवाओं को आत्मनिर्भर बनाएगा।”

जोन B: गणेश घाट एवं रिवर फ्रंट – प्रकृति और संस्कृति का संगम
गणेश घाट पर 1200 रनिंग मीटर लंबा पाथवे, पत्थर की सीढ़ियाँ, शौचालय, चेंजिंग रूम, मेडिकल सुविधा, कंट्रोल रूम और वेंडिंग शॉप्स बनेंगी। यह जोन धार्मिक अनुष्ठानों को सुगम बनाते हुए पर्यटन को नया आयाम देगा।

जोन C: श्रृंगी ऋषि स्थल – हिलटॉप रिट्रीट का जादू

श्रृंगी ऋषि स्थल को ध्यान, ट्रैकिंग और प्रकृति दर्शन के लिए विकसित किया जाएगा। यह शांति और सांस्कृतिक चेतना का केंद्र बनेगा, पर्यटकों को आध्यात्मिक अनुभव प्रदान करेगा।

MAA अभियान: नदी पुनर्जीवन की मिसाल, जनभागीदारी से चमत्कार

MAA अभियान की शुरुआत 2 मई से हुई, जिसमें 8 ग्राम पंचायतों में 55 दिनों में नालों की सफाई, तटबंध मजबूती, झाड़ियाँ हटाना और कचरा निष्कासन किया गया। कर्नाटक के मेगा फाउंडेशन के सहयोग से तकनीकी सर्वे पूरा हुआ। 4,000 नारियल पौधे लगाए गए, चार चेक डैम प्रस्तावित हैं। देवपुर सरपंच आत्माराम नेताम बोले, “ग्रामीणों का श्रमदान और प्रशासन की प्रतिबद्धता ने नदी को नया जीवन दिया। अब भूजल रिचार्ज और फसल विविधीकरण संभव हुआ।”

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अभियान की सराहना करते हुए कहा, “सुशासन के संकल्प से हम प्राकृतिक धरोहर को संवार रहे हैं। MAA छत्तीसगढ़ के सकारात्मक बदलाव की मिसाल है।”

भविष्य की राह: पर्यटन, रोजगार और सतत विकास

चरण-2 में इको-टूरिज्म, अवसंरचना उन्नयन और पौधरोपण शामिल हैं। सतत कृषि से किसानों को लाभ होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह मॉडल अन्य नदियों के लिए प्रेरणा बनेगा। सिहावा अब न केवल धार्मिक स्थल, बल्कि आर्थिक समृद्धि का प्रतीक बनेगा—जहाँ महानदी की स्वच्छ धारा सदियों पुरानी विरासत को नई चमक देगी।

CHANDRABHAN YADAW

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